नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के प्रबंध निदेशक एस एस मल्लिकार्जुन राव ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में उनका बैंक राजकोषीय आय और कोर बैंकिंग गतिविधियों के दम पर लाभ कमाने की स्थिति में लौट जायेगा। देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पीएनबी को मार्च में समाप्त चौथी तिमाही में 697.20 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। हालांकि, नीरव मोदी की धोखाधड़ी के दो साल के अंतराल के बाद बैंक ने 2019-20 के दौरान 363.34 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक ने कोविड-19 संकट के कारण चालू वित्त वर्ष के लिये अपने ऋण वृद्धि लक्ष्य को 6 प्रतिशत तक घटा दिया है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, "मूल रूप से, हमने 12 प्रतिशत की ऋण वृद्धि की योजना बनायी थी, लेकिन कोविड प्रभाव के कारण हमने ऋण वृद्धि के लक्ष्य को 6 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है।" हालांकि, उन्होंने कहा, ब्याज दरों में कमी के कारण बैंक को राजकोषीय लाभ होता है।
राव ने कहा कि पीएनबी ने पहले ही सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) की कीमतों में कमी के परिणामस्वरूप एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का लाभ कमाया है। बैंक बाजार में उच्च कूपन दर पर जी-सेक बेच रहे हैं और इन प्रतिभूतियों की बिक्री के कारण लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरी उम्मीद यह है कि राजकोषीय लाभ जारी रहेगा। यदि ब्याज दर बढ़ जाती है तो इस तरह का लाभ तीसरी और चौथी तिमाही में मध्यम रहेगा।" उन्होंने कहा कि यदि इससे अलग परिचालन से प्राप्त लाभ को देखते हैं, तो 2019-20 के दौरान हमने निरंतर बेहतर प्रदर्शन किया है। यह केवल प्रावधान के कारण था कि हमने तीसरी और चौथी तिमाही में जो परिणाम घोषित किया, उसमें शुद्ध लाभ बहुत कम था या घाटा हुआ था। अब जो कुछ भी प्रावधान करना बाकी है, हम सितंबर 2020 तक पूरी तरह से इसे निपटा देंगे। उन्होंने कहा कि तीसरी तिमाही के बाद से प्रावधान प्रभाव कम होगा, जबकि परिचालन लाभ बढ़ेगा।
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