आजाद भारत का पहला भाषण देने से पहले रोये थे नेहरू, लाहौर से आया था फोन

14 अगस्त 1947, भारत टुकड़ों में बंट चुका था। मोहम्मद अली जिन्नाह की जिद्द ने हिंदुस्तान के मुकद्दर में ऐसा जख्म लिख दिया था, जिससे आज भी रह-रहकर दर्द रिसता रहता है।

from India TV Hindi: TopStory Feed https://ift.tt/37If9iN

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ