नई दिल्ली। दिल्ली में 4 मई से दोबारा शुरू हुई शराब बिक्री से राज्य सरकार ने शराब पर लगाए गए विशेष कोरोना सेस से 21 दिनों में 160 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया है। सरकार को 4 मई से 30 मई तक 235 करोड़ रुपए की शराब बिक्री की है, इसमें कोरोना सेस शामिल नहीं है। लॉकडाउन का तीसरा चरण शुरू होने के साथ ही शहर में चार मई से शराब बिक्री की अनुमति दी गई थी। इसके पहले लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही 25 मार्च से शराब बिक्री बंद थी।आबकारी विभाग के आंकड़े के अनुसार, पहले दिन पांच करोड़ रुपए की शराब बिकी थी, जब विशेष सेस लागू नहीं था।
लेकिन शराब बिक्री की अनुमति देने के एक दिन बाद यानी पांच मई से दिल्ली सरकार ने शराब बिक्री पर विशेष कोरोना शुल्क लगा दिया, जो एमआरपी का 70 प्रतिशत था। दूसरे दिन सेस को छोड़कर लगभग 4.4 करोड़ रुपए की बिक्री हुई, जबकि छह मई को 4.9 करोड़ रुपए की बिक्री हुई।
उसके बाद आठ और नौ मई को क्रमश: 15 करोड़ और 18 करोड़ रुपए की बिक्री हुई। इस बिक्री राशि में कोरोना शुल्क शामिल नहीं है। और यह महीने के दौरान दिन भर की सर्वाधिक बिक्री है। सरकार ने 30 मई तक 234.54 करोड़ रुपए की शराब की बिक्री की और विशेष कोरोना शुल्क के रूप में लगभग 160 करोड़ रुपए अतिरिक्त प्राप्त हुए। इस दौरान सात मई और 25 मई को दो ड्राई डे थे।
2020-21 के बजट में कर राजस्व में सरकार की कुल उम्मीद का 14 प्रतिशत यानी 6,300 करोड़ रुपए राज्य आबकारी से था। लेकिन पहली अप्रैल से शुरू हुए नए वित्त वर्ष में कोरोनावायरस के कारण लागू लॉकडाउन के चलते तीन मई तक कोई बिक्री नहीं हुई। चार सरकारी निगम- दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रान्सपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, दिल्ली स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड, और दिल्ली कंज्यूमर्स को-ऑपरेटिव होलसेल स्टोर- लगभग 475 दुकानों के जरिये शराब बिक्री को नियंत्रित करते हैं।
कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के चलते हुए राजस्व नुकसान के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने 31 मई को केंद्र सरकार से 5,000 करोड़ रुपए की मांग की थी। दिल्ली के वित्तमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि सरकार का न्यूनतम मासिक व्यय 3,500 करोड़ रुपए है, जिसमें वेतन भी शामिल है। सिसोदिया ने कहा था पिछले दो महीनों में हर महीने 500 करोड़ रुपए का कर संग्रह हुआ। अन्य स्रोतों से 1,735 करोड़ रुपए संग्रह हुए। लेकिन दो महीनों के लिए हमें 7,000 करोड़ रुपए की जरूरत है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीन मई को कहा कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल अप्रैल में 3,200 करोड़ रुपए राजस्व का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा था कि लॉकडाउन के कारण सरकार को अपने कर्मचारियों को वेतन भुगतान में भी दिक्कत आ रही है।
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